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यह पाठ्यपुस्तक "हिंदुस्तानी संगीत—गायन एवं वादन" का मुख्य उद्देश्य छात्रों को हिंदुस्तानी संगीत के विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं से परिचित कराना और उनकी संगीत संबंधी दक्षता तथा कौशल को विकसित करना है। यह पुस्तक विशेष रूप से उन उच्चतर माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों के लिए डिज़ाइन की गई है जो हिंदुस्तानी संगीत में गायन एवं वादन की बारीकियों को सीख रहे हैं। इसका लक्ष्य भारतीय संगीत की समृद्ध ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और उसके विकास का गहन ज्ञान प्रदान करना है, जिससे छात्र एक समग्र संगीत शिक्षा का अनुभव प्राप्त कर सकें।
यह पाठ्यपुस्तक भारतीय संगीत के प्राचीनतम इतिहास का विस्तृत व्याख्यान प्रस्तुत करती है, जिसमें संगीत की उत्पत्ति और उसके क्रमिक विकास का वर्णन किया गया है। यह वैदिक काल से लेकर तेरहवीं शताब्दी तक और फिर चौदहवीं शताब्दी से आधुनिक काल तक संगीत के विभिन्न चरणों को स्पष्ट करती है। इसमें हिंदुस्तानी संगीत के अंतर्गत विभिन्न घरानों के उद्गम एवं विकास, संगीत शिक्षा के संस्थानों की प्रगति, और 'संगीत रत्नाकर' तथा अन्य महत्वपूर्ण आधार ग्रंथों में वर्णित विषयवस्तु की विस्तृत जानकारी भी शामिल है। इसके अलावा, इसमें ध्रुपद, ख्याल, और ठुमरी जैसी प्रमुख गायन शैलियों का भी सविस्तार वर्णन किया गया है।
पुस्तक केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक ही सीमित नहीं है, बल्कि हिंदुस्तानी संगीत के प्रयोगात्मक पक्ष पर भी पर्याप्त प्रकाश डालती है। इसमें पाठ्यक्रम में दिए गए रागों का विस्तृत विवरण और उनमें गाई-बजाई जाने वाली विभिन्न बंदिशें सम्मिलित हैं, जो छात्रों को संगीत की विधाओं के व्यावहारिक पक्ष को समझने में सहायता करती हैं। पाठ्यपुस्तक में कई रोचक और ज्ञानवर्धक परियोजनाएँ भी शामिल की गई हैं, जो छात्रों के लिए सीखने की प्रक्रिया को और अधिक आकर्षक बनाती हैं। यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के दिशानिर्देशों के अनुरूप तैयार की गई है, जिससे भारतीय संगीत की सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण और उन्नयन सुनिश्चित हो सके।