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यह पाठ्यपुस्तक 'संगीत – तबला एवं पखावज – हमारे अवनद्ध वाद्य' उच्च माध्यमिक स्तर पर कक्षा बारहवीं के विद्यार्थियों के लिए प्रस्तुत की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य उन बच्चों की दक्षताओं को बढ़ाना है जो अवनद्ध वाद्य-वादन सीख रहे हैं। यह पुस्तक विद्यार्थियों के ज्ञानवर्धन के साथ-साथ उन्हें उच्च शिक्षा के लिए भी मार्ग प्रशस्त करती है, जिससे वे तबला एवं पखावज विषय में स्नातक, परास्नातक व शोध करने की रुचि को एक मजबूत नींव दे सकें।
यह पाठ्यपुस्तक अवनद्ध वाद्यों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि एवं विकास के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करती है। विद्यार्थी तबला एवं पखावज की मुख्य विशेषताओं को विस्तार से समझ सकते हैं और इनके मूल बोलों का ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं। पुस्तक में कर्नाटक पद्धति में ताल एवं लिपि पद्धति का विवेचन किया गया है और यह सिखाया गया है कि अवनद्ध वाद्यों के ताल तथा रचना प्रकारों को कैसे लिपिबद्ध किया जाए। इसके अतिरिक्त, यह पुस्तक अवनद्ध वाद्यों के विकास में सहायक तबला एवं पखावज के प्रसिद्ध कलाकारों एवं उनके घरानों के बारे में भी गहन जानकारी देती है, जिससे छात्रों को भारतीय संगीत की समृद्ध परंपरा और उसके दिग्गजों से परिचय होता है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप, यह पाठ्यपुस्तक विद्यार्थियों को संगीत, कला और शिल्प के विषयों में अधिक लचीलापन और विकल्प प्रदान करती है। भारतीय संगीत के गहन अध्ययन से छात्रों को भाषा के साथ-साथ संगीत की सामग्री को जानने का भी अवसर मिलता है। यह संस्कृत भाषा की नींव को दृढ़ करने और भारत के पुरातन शास्त्रों के ज्ञान को सशक्त बनाने में भी सहायक है। यह कला प्रेमियों के लिए भी लाभप्रद सिद्ध होगी जो अन्य अवनद्ध वाद्यों में रुचि रखते हैं, इस प्रकार यह संगीत और सौंदर्यशास्त्र के संरक्षण के लिए आजीवन प्रेरणा का स्रोत बनती है।