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यह पाठ्यपुस्तक, "संगीत – तबला एवं पखावज – हमारे अवनद्ध वाद्य," उच्च माध्यमिक स्तर के उन विद्यार्थियों के लिए तैयार की गई है जो अवनद्ध वाद्य-वादन सीख रहे हैं। यह पुस्तक तबला और पखावज जैसे महत्वपूर्ण वाद्यों के गहन अध्ययन पर केंद्रित है, जिन्हें सृष्टि एवं सृजन कला का महत्वपूर्ण अंग माना जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों को इन प्रसिद्ध वाद्यों के बारे में विस्तृत ज्ञान प्रदान करना है, जिन्हें विशेषज्ञों ने दशकों के कठिन परिश्रम से संवारा और शोध किया है। यह पाठ्यपुस्तक स्कूली शिक्षा के दौरान बच्चों के मूल्य संवर्धन के लिए भी प्रासंगिक है और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप कला शिक्षा को बढ़ावा देती है।
यह पुस्तक संगीत के संक्षिप्त इतिहास से लेकर शास्त्रीय संगीत के आधारभूत तत्वों और सांगीतिक परिभाषाओं का परिचय देती है। इसमें तबला और पखावज का सचित्र वर्णन, उनकी उत्पत्ति एवं विकास, वाद्यों का वर्गीकरण, विभिन्न अवनद्ध वाद्यों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का विवरण शामिल है। विद्यार्थियों को तबला एवं पखावज के वर्णों (बोलों) और उनकी वादन विधियों के बारे में विस्तार से जानने को मिलेगा। इसके अतिरिक्त, पाठ्यपुस्तक में तालों के ठेके लिखने की पद्धतियाँ, विशेष रूप से भातखंडे ताल लिपि पद्धति, तबला एवं पखावज के विभिन्न घरानों का उल्लेख, और महान कलाकारों एवं संगीतज्ञों के योगदान पर विस्तृत चर्चा की गई है।
यह पाठ्यपुस्तक छात्रों के लिए कई मायनों में फायदेमंद है। यह उन्हें अवनद्ध वाद्यों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और विकास की गहरी समझ प्रदान करती है, जिससे वे तबला एवं पखावज की मुख्य विशेषताओं, मूल बोलों और वादन विधियों को विस्तार से समझ पाते हैं। छात्र तालों के स्वरूपों और प्रकारों को लिपिबद्ध करना सीखते हैं, और प्रसिद्ध कलाकारों एवं उनके घरानों के बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं। यह पुस्तक विद्यार्थियों को तबला एवं पखावज के उच्चस्तरीय अध्ययन के लिए प्रेरित करती है और कला प्रेमियों के लिए भी अत्यंत लाभप्रद सिद्ध होती है, जिससे वे अपना ज्ञानवर्धन कर सकें और वाद्यों को बजाना सीख सकें।