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यह पाठ्यपुस्तक, 'क्षितिज भाग 2', दसवीं कक्षा के हिंदी 'अ' पाठ्यक्रम के लिए विशेष रूप से तैयार की गई है, जैसा कि आपके प्रारंभिक परिचय में स्पष्ट है, यह छात्रों के ज्ञान, समझ और साहित्यिक मूल्यों को बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण और अद्वितीय भूमिका निभाती है। इस पुस्तक का मुख्य ध्येय विद्यार्थियों को हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा और उसकी विविधताओं से गहराई से परिचित कराना है, जिससे उनका व्यक्तिगत और अकादमिक विकास सशक्त हो सके। इसमें कुल सत्रह रचनाकारों की कृतियाँ संकलित हैं, जिनमें आठ गद्य रचनाएँ और नौ कवियों की कविताएँ शामिल हैं, जो उन्हें विधाओं और शैलियों की विविधता के माध्यम से साहित्य के विभिन्न पहलुओं का अनुभव प्रदान करती हैं।
गद्य खंड में विचारात्मक और व्यंग्यात्मक निबंधों के साथ-साथ कहानी, संस्मरण, रेखाचित्र और आत्मकथा जैसी प्रमुख विधाएँ सम्मिलित हैं। इन पाठों का संयोजन 'सरलता से कठिनता की ओर' के सिद्धांत पर आधारित है, जो यह सुनिश्चित करता है कि छात्र पाठ्य सामग्री को सहजता से समझ सकें और अपने साहित्यिक कौशल का विकास कर सकें। वहीं, कविता खंड में भक्तिकाल, रीतिकाल और आधुनिक काल की विभिन्न प्रवृत्तियों का प्रतिनिधित्व करने वाले कवियों की रचनाओं को ऐतिहासिक कालक्रम के अनुसार रखा गया है, जिससे विद्यार्थियों को हिंदी कविता की विकास-यात्रा की एक समग्र झलक मिल सके और वे उसके कालानुक्रमिक विकास से परिचित हो सकें।
यह पाठ्यपुस्तक राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (2005) और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (2020) के सिद्धांतों को ध्यान में रखकर पुनर्संयोजित की गई है। इसका विशेष ज़ोर पाठ्य सामग्री का बोझ कम करने, रचनात्मक नज़रिए से अनुभवात्मक अधिगम के अवसर प्रदान करने और विद्यार्थियों की कल्पनाशीलता, उत्सुकता एवं जिज्ञासा को विकसित करने पर है। यह पुस्तक केवल पाठ्यक्रम का एक हिस्सा नहीं है, बल्कि संवेग, विचारशीलता और सांस्कृतिक मानवीयता को भी उजागर करती है, जिससे विद्यार्थियों को आधुनिक जीवन के परिवेश और दिन-प्रतिदिन के बदलते जीवन की चुनौतियों के बीच मानव मूल्यों के प्रति अडिग आस्था बनाए रखने की प्रेरणा मिलती है।