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यह पाठ्यपुस्तक, जिसे 'कृतिका भाग 2' के नाम से जाना जाता है, विशेष रूप से कक्षा 10 के 'अ' पाठ्यक्रम के विद्यार्थियों के लिए NCERT द्वारा प्रकाशित की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों को विविध साहित्यिक रचनाओं से परिचित कराना और उनमें पढ़ने की गहन आदत विकसित करना है। यह पुस्तक केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रहकर, विद्यार्थियों के स्कूली जीवन को बाहरी दुनिया से जोड़ने के महत्वपूर्ण विचार पर आधारित है, जिससे वे साहित्य के माध्यम से जीवन की गहरी समझ विकसित कर सकें।
इस पूरक पाठ्यपुस्तक का निर्माण राष्ट्रीय शिक्षा नीति (1986) और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा-2005 के सिद्धांतों के अनुरूप किया गया है। ये सिद्धांत बाल-केंद्रित शिक्षा और रचनात्मक अनुभवात्मक अधिगम पर विशेष जोर देते हैं। 'कृतिका भाग 2' का एक महत्वपूर्ण लक्ष्य विद्यार्थियों के विचार बोध, भाव बोध और भाषा बोध को समृद्ध करना है, जिससे उनकी आलोचनात्मक सोच, भावनात्मक समझ और भाषाई कौशल का समुचित विकास हो सके।
इस संकलन में तीन प्रमुख साहित्यिक कृतियाँ शामिल हैं। पहली, शिवपूजन सहाय के उपन्यास 'देहाती दुनिया' का अंश 'माता का आँचल' है, जो ग्रामीण जीवन और लोकसंस्कृति का एक अनोखा और हृदयस्पर्शी चित्रण प्रस्तुत करता है। दूसरी रचना मधु कांकरिया का यात्रा-वृत्तांत 'साना-साना हाथ जोड़ि...' है, जिसमें लेखिका ने पूर्वोत्तर भारत के सिक्किम राज्य, विशेषकर गंगतोक और हिमालय की अपनी यात्रा के अनुभवों को शब्दबद्ध किया है। यह कृति प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ वहाँ के निवासियों की मेहनत, अभाव और जीवन संघर्ष को भी दर्शाती है। तीसरी रचना अज्ञेय का आत्मकथात्मक निबंध 'मैं क्यों लिखता हूँ?' है, जिसमें वे एक रचनाकार की आंतरिक विवशता और अनुभव से अनुभूति में रूपांतरण की प्रक्रिया को गहराई से समझाते हैं। ये तीनों रचनाएँ मिलकर विद्यार्थियों के लिए साहित्य का एक समृद्ध, विविध और रोचक संसार प्रस्तुत करती हैं।