आरोह (भाग-2) - Hindi | Class 12 (Hindi)

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आरोह (भाग-2) - Hindi | Class 12 (Hindi)

'आरोह भाग-2' कक्षा 12 के हिंदी (आधार पाठ्यक्रम) विद्यार्थियों के लिए राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद् (NCERT) द्वारा निर्मित एक महत्वपूर्ण पाठ्यपुस्तक है। इस पुस्तक का मूल उद्देश्य स्कूली शिक्षा को वास्तविक जीवन से जोड़ना है, ताकि विद्यार्थी केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रहें, बल्कि व्यापक शैक्षिक लक्ष्यों को प्राप्त कर सकें। इन लक्ष्यों में विचार और कार्य की स्वतंत्रता का विकास, दूसरों की भलाई और भावनाओं के प्रति संवेदनशीलता, नई परिस्थितियों का लचीलेपन और रचनात्मक तरीके से सामना करने की क्षमता, लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में सक्रिय भागीदारी, तथा आर्थिक एवं सामाजिक बदलाव में योगदान देने की प्रवृत्ति शामिल है। यह पाठ्यपुस्तक विद्यार्थियों को ज्ञान और संवेदनशीलता का विकास करने में सहायता करती है।

यह पुस्तक मुख्य रूप से दो खंडों में विभाजित है: काव्य खण्ड और गद्य खण्ड, जिनका विभाजन विद्यार्थियों की समझ और उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया है। काव्य खण्ड में हिंदी कविताओं के साथ-साथ अन्य भारतीय भाषाओं की कविताओं को भी शामिल किया गया है, जिससे विद्यार्थियों को एक बहुभाषिक दृष्टिकोण मिलता है और वे विभिन्न सांस्कृतिक संदर्भों से परिचित होते हैं। इस खंड का क्रम सरल रखा गया है ताकि पाठक कविता-भाषा में प्रस्तुत भावों और संदेशों को आसानी से ग्रहण कर सकें। इसमें आलोक धन्वा की 'पतंग', सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' की 'बादल राग', शमशेर बहादुर सिंह की 'उषा', कुँवर नारायण की 'कविता के बहाने' और 'बात सीधी थी पर', उमाशंकर जोशी की 'छोटा मेरा खेत' और 'बगुलों के पंख', फिराक गोरखपुरी की 'रुबाइयाँ', तथा गोस्वामी तुलसीदास की 'कवितावली' जैसी विविध रचनाएँ सम्मिलित हैं।

गद्य खण्ड में भी विभिन्न प्रकार की रचनाएँ शामिल हैं जो सामाजिक, सांस्कृतिक और मानवीय मूल्यों पर गहराई से प्रकाश डालती हैं। इनमें महादेवी वर्मा का संस्मरणात्मक रेखाचित्र 'भक्तिन', जैनेंद्र कुमार का निबंध 'बाज़ार दर्शन', धर्मवीर भारती का संस्मरण 'काले मेघा पानी दे', हजारी प्रसाद द्विवेदी का ललित निबंध 'शिरीष के फूल', और डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा 'श्रम विभाजन और जाति-प्रथा' जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं। ये सभी रचनाएँ मिलकर पुस्तक को ज्ञान और चिंतन का एक समृद्ध स्रोत बनाती हैं, जिससे विद्यार्थियों को न केवल शैक्षणिक बल्कि सामाजिक दृष्टिकोण से भी समृद्ध होने में सहायता मिलती है। यह पुस्तक वर्तमान समय में बाजार, साहित्यिक मानकों और भाषिक विविधता का प्रभावी समन्वय प्रस्तुत करती है।