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पुस्तक 'आरोह' ग्यारहवीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए तैयार किया गया एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक संसाधन है, जिसका मुख्य उद्देश्य हिंदी भाषा और साहित्य के अध्ययन को सरल, आनंददायक और बोझरहित बनाना है। यह राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा-2005 के सिद्धांतों का पालन करती है, जो शिक्षा को विद्यार्थी के जीवन, रुचि और अनुभव संसार का हिस्सा बनाने पर जोर देती है। इस पुस्तक का लक्ष्य छात्रों को केवल ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि उन्हें हिंदी भाषा के समृद्ध और गतिशील परिदृश्य से जोड़ना है, साथ ही उन्हें रचनात्मक और मनोवैज्ञानिक रूप से सकारात्मक अनुभव देना है। यह आधुनिक हिंदी के विकासक्रम को दर्शाते हुए साहित्य के विभिन्न रूपों को प्रस्तुत करती है, जिससे विद्यार्थी भाषा के बदलते आयामों से परिचित हो सकें।
'आरोह' पुस्तक को दो मुख्य खंडों में विभाजित किया गया है: गद्य खंड और काव्य खंड। गद्य खंड में भारतेंदु युगीन हिंदी रचनाओं से लेकर, जो आधुनिक चेतना और नवजागरण की ऊर्जा से ओत-प्रोत हैं, वर्तमान हिंदी गद्य की विविधतापूर्ण रचनाओं को शामिल किया गया है। इसमें शब्दचित्र, आत्मकथा और पटकथा जैसी कई नई साहित्यिक विधाएँ भी प्रस्तुत की गई हैं, जिससे विद्यार्थियों के सृजनात्मक कौशल का विकास हो सके और वे आधुनिक साहित्यिक अभिव्यक्तियों को समझ सकें। काव्य खंड मुख्य रूप से खड़ी बोली की कविताओं पर केंद्रित है। इसमें हिंदी कविता की गहरी जड़ों और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की जानकारी के लिए कबीर और मीरा के पदों का चयन किया गया है, जबकि रामनरेश त्रिपाठी से लेकर दुष्यंत कुमार तक की कविताओं के माध्यम से आधुनिक हिंदी कविता की शैलियों और मुहावरों से परिचय कराया गया है। इसके अतिरिक्त, अक्क महादेवी, पाश और निर्मला पुतुल जैसे कवियों की रचनाओं को शामिल करके हिंदी कविता के समानांतर भारतीय भाषाओं की कविताओं की भी समझ विकसित करने का प्रयास किया गया है, जिससे विद्यार्थियों का भाषाई संसार विस्तृत हो सके और वे स्त्री, दलित और आदिवासी लेखकों की ऊर्जावान अभिव्यक्तियों से जुड़ सकें।
यह पुस्तक विद्यार्थियों, अध्यापकों और स्वयं पुस्तक के बीच एक संवादात्मक रिश्ता कायम करने का प्रयास करती है, जिससे अधिगम की प्रक्रिया निरंतर बेहतर होती रहे। इसकी साज-सज्जा में लोकचित्रों का उपयोग किया गया है, जो विद्यार्थियों को एक अलग सांस्कृतिक दुनिया में ले जाते हैं और उन्हें अपनी जड़ों से जुड़ने का एहसास कराते हैं। इस प्रकार, 'आरोह' हिंदी साहित्य के एक व्यापक और गतिशील परिदृश्य को प्रस्तुत करते हुए विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में सहायक है।