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यह पाठ्यपुस्तक, जिसका नाम 'अंतरा' है, ग्यारहवीं कक्षा में ऐच्छिक हिंदी पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए विशेष रूप से तैयार की गई है। इस पुस्तक का मूल आधार राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (2005) के सिद्धांत हैं, जो बच्चों के स्कूली जीवन को बाहरी दुनिया से जोड़ने और उन्हें केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखने पर ज़ोर देते हैं। यह बाल-केंद्रित शिक्षा व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसका उद्देश्य जानकारी को रटाने की प्रवृत्ति का विरोध करना और सीखने की प्रक्रिया में बच्चों को कल्पनाशील गतिविधियों तथा सवालों के माध्यम से अपने अनुभवों पर विचार करने का अवसर प्रदान करना है। यह पाठ्यपुस्तक सुनिश्चित करती है कि विद्यार्थी मानसिक दबाव और बोरियत के बजाय खुशी का अनुभव करते हुए सीखें।
इस पाठ्यपुस्तक में हिंदी साहित्य की विविध विधाओं से संबंधित नौ गद्य रचनाएँ और दस कवियों की कविताएँ संकलित की गई हैं। चयन का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को हिंदी गद्य और कविता के विकास-क्रम से परिचित कराना है, ताकि वे साहित्य के ऐतिहासिक और सामाजिक संदर्भों को समझ सकें। कहानियों, व्यंग्य, जीवनी और भाषण जैसी विभिन्न गद्य रचनाओं के माध्यम से विद्यार्थी न केवल सामाजिक प्रतिबद्धता और हिंदी भाषा की शैलियों की शक्ति से लाभ उठा सकेंगे, बल्कि समाज, संस्कृति और इतिहास से संबंधित विचारणीय बिंदुओं को भी गहराई से समझ पाएँगे। इसी प्रकार, कविताओं का चयन भी हिंदी कविता के वस्तु, शैली और शिल्प में समय-समय पर हुए अपेक्षित परिवर्तनों को उजागर करता है, जिससे विद्यार्थी इस विकास यात्रा से परिचित हो सकें।
विद्यार्थियों के लाभ के लिए, इस पुस्तक में हर पाठ के साथ प्रश्न-अभ्यास और विभिन्न क्रियाकलाप दिए गए हैं। इनका उद्देश्य यह है कि पाठ अधिक से अधिक खुलकर विद्यार्थियों के लिए बोधगम्य बनें और वे इन गतिविधियों के माध्यम से पाठ के अधिकाधिक निकट पहुँच सकें। कोविड-19 महामारी और राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए, पाठ्य सामग्री का बोझ कम करने और रचनात्मक नज़रिए से अनुभवात्मक अधिगम के अवसर प्रदान करने पर भी जोर दिया गया है। आशा है कि यह पाठ्यपुस्तक विद्यार्थियों की भाषिक तथा साहित्यिक रुचियों के विकास में अत्यधिक उपयोगी सिद्ध होगी और उन्हें हिंदी साहित्य के विभिन्न आयामों से जुड़ने का एक समृद्ध अनुभव प्रदान करेगी।